P/E रेशियो (प्राइस टू अर्निंग)
P/E रेशियो शेयर की कीमत को पिछले 12 महीनों की प्रति शेयर कमाई (EPS) से भाग देकर निकलता है। यह बताता है कि कंपनी की हर एक रुपये की कमाई के लिए बाजार कितने रुपये दे रहा है।
उदाहरण: ₹500 का शेयर और ₹25 EPS हो तो P/E 20 होगा।
- ऊँचा P/E अक्सर तेज़ ग्रोथ की उम्मीद दिखाता है, या यह कि पिछले साल कमाई असामान्य रूप से कम रही।
- कम P/E धीमी ग्रोथ, ज़्यादा जोखिम या असामान्य रूप से अच्छे साल का संकेत हो सकता है।
- P/E की तुलना एक ही सेक्टर के अंदर करें; बैंक, IT और FMCG का सामान्य P/E बहुत अलग होता है।
- घाटे वाली कंपनी का P/E अर्थपूर्ण नहीं होता।
सिर्फ P/E से यह तय नहीं होता कि शेयर सस्ता है या महँगा; ग्रोथ, कर्ज़ और कमाई की गुणवत्ता भी देखें।
NSE Scanner पर कहाँ देखें
हर शेयर के पेज पर P/E दिया है, और तुलना वाले पेज पर दो कंपनियों का P/E साथ-साथ दिखता है।
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