52 हफ्ते का हाई क्या है?
52-week high किसी शेयर की पिछले 52 हफ्तों (लगभग एक साल, करीब 250 ट्रेडिंग दिन) की सबसे ऊँची कीमत है। इसी तरह 52-week low उस अवधि की सबसे नीची कीमत है।
नया 52 हफ्ते का हाई क्या बताता है
जब कोई शेयर अपने पिछले एक साल के सबसे ऊँचे स्तर के ऊपर जाता है, तो इसका मतलब है कि पिछले एक साल में उस कीमत पर खरीदने वाला हर व्यक्ति अभी मुनाफे में है। इसलिए कई ट्रेडर ऐसे शेयरों पर नज़र रखते हैं। लेकिन यह सिर्फ बीते समय की कीमत का वर्णन है, आगे की दिशा की गारंटी नहीं।
साथ में क्या देखें
- वॉल्यूम: क्या नया हाई सामान्य से ज़्यादा वॉल्यूम पर बना? कम वॉल्यूम वाला हाई कमज़ोर संकेत माना जाता है।
- बंद भाव: दिन के दौरान हाई छूना और उसके ऊपर बंद होना अलग बातें हैं।
- 50-दिन के औसत से दूरी: कीमत औसत से बहुत ऊपर हो तो चाल खिंची हुई हो सकती है।
- इतिहास: किसी नए लिस्टेड शेयर के पास पूरे साल का डेटा नहीं होता, इसलिए उसका "52 हफ्ते का हाई" असली अर्थ में एक साल का नहीं होता।
सावधानियाँ
- बोनस या स्प्लिट के बाद पुरानी कीमतें समायोजित (adjust) होनी चाहिए, नहीं तो हाई-लो गलत दिख सकता है।
- हाई के पास पहुँचना और हाई तोड़ना अलग है; कई बार शेयर हाई के पास से वापस गिर जाते हैं।
- केवल कीमत देखकर नहीं, कंपनी के नतीजे और कारोबार भी समझें।
NSE Scanner पर कहाँ देखें
आज का बाजार पेज पर उस दिन नए 52 हफ्ते के हाई बनाने वाले शेयर, और हर शेयर के पेज पर उसका 52-week high और low दिया गया है।